मुजफ्फरपुर, 1 अगस्त (आईएएनएस)। बिहार के कई जिलों में बाढ़ ने कई लोगों को बेघर कर दिया है। जिन लोगों ने अपने घरों के दृश्यों को खुद को पानी में डूबते हुए देखा है, उन्होंने अब अपने घरों को सड़कों के किनारे बना दिया है। ये लोग, जो कभी गांवों में शान से रहते थे, आज अपने पालतू जानवरों के साथ सड़कों के किनारे रहने को मजबूर हैं।

बाढ़ के कारण, तटबंधों और सड़क के किनारे टेंट और कपड़ों के लटकने के कारण, ये लोग न तो प्रशासन से खुश हैं और न ही सरकार से। ये लोग गाँव से पानी कम आने के इंतज़ार में अपना जीवन बिता रहे हैं, अगर पानी कम होता है तो वे गाँव में पहुँचेंगे और तबाह परिवार को फिर से बसायेंगे।

राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 77 पर एक झोपड़ी में रहने वाले गायघाट के निवासी शंकर महतो ने कहा, “हमें अब प्रशासन और राजनीतिक नेताओं से कोई उम्मीद नहीं है।” हम बस बाढ़ के पानी के उतरने का इंतजार कर रहे हैं। कोई भी मदद करने के लिए यहां नहीं आया है।

ऐसे कई लोग हैं जो सड़कों पर दिन और रात बिता रहे हैं, जिन्होंने बाढ़ के डर से और बाढ़ के बाद अपने घर से कुछ राशन एकत्र किया था, उन्होंने उन राशन के साथ यहां अपना घर बनाया। लेकिन, कई लोग ऐसे हैं जो बाढ़ के पानी के गांव में घुसते ही अपनी जान बचाने के लिए भाग गए। ऐसे लोगों की मुसीबत बढ़ गई है। उनका पेट भरना भी मुश्किल हो रहा है। वे आने-जाने वाले वाहनों से कुछ मांग कर अपना काम कर रहे हैं।

औराई, मीनापुर ब्लॉक के लोग NH-77 पर रहते हैं और कई गाँवों के लोग NH-57 पर झोपड़ियों में रह रहे हैं। उनके बच्चे भी उन दिनों का इंतजार कर रहे हैं जब उनके गांव से पानी निकलेगा।

औराई ब्लॉक के बेनीपुर गाँव से निकलकर शंकर सिंह अपने पूरे परिवार के साथ अपनी झोपड़ी में लेटे हैं। बाढ़ के पानी ने उनकी जीवन भर की कमाई को बर्बाद कर दिया। उनके पास बर्तन भी नहीं हैं जिनमें वे खाना बना सकें।

उन्होंने बताया कि वे अपने आसपास के लोगों से बर्तन मांग कर खाना पकाते हैं। बाढ़ में कुछ भी नहीं बचा है, सब कुछ डूब गया है। हालांकि वे यह भी कहते हैं कि सामुदायिक रसोई के खुलने के बाद राहत मिलती है। लोग वहीं खा रहे हैं।

गोपालगंज में भी कई बाढ़ पीड़ित सड़कों के किनारे आश्रय बनाकर अपना जीवन यापन कर रहे हैं। गोपालगंज में, लोग किसी तरह सड़क के किनारे दिन बिता रहे हैं, लेकिन रात में वे डरते हैं।

मुजफ्फरपुर जिले के जनसंपर्क अधिकारी कमल सिंह का कहना है कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य जारी है। सामुदायिक रसोई में भी लोगों को भोजन कराया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि मुजफ्फरपुर के 13 ब्लॉकों की 202 पंचायतों में बाढ़ का पानी घुस गया है, जिससे 11 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। जिला प्रशासन का दावा है कि 189 सामुदायिक रसोईघर चलाए जा रहे हैं। हालाँकि इस जिले में अभी तक राहत शिविर नहीं लगाए गए हैं।

बिहार के 14 जिलों के 110 ब्लॉकों की 4.5 मिलियन से अधिक आबादी बाढ़ से प्रभावित है।

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