महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन

महाराष्ट्र में किसी भी राजनितिक दल द्वारा सरकार बनाने का दावा पेश न कर पाने की वजह से आखिरकार राज्य में राष्ट्रपति शासन (President Rule In Maharashtra) लागू कर दिया गया। चुनाव नतीजे आने के 15 दिन बाद भी जब राज्य में कोई भी दल बहुमत साबित नहीं कर पाया तब राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की गई। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी (Governor Bhagat Singh Koshyari) की सिफारिश को पहले कैबिनेट से मंजूरी मिली। इसके बाद राष्ट्रपति द्वारा मंजूरी दिए जाने पर राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया।

President Of India
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किन परिस्थितियों में लगता है राष्ट्रपति शासन

गौरतलब है कि संविधान के अनुच्छेद 356 (Article 356) में किसी भी राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने का प्रावधान है। किसी भी राज्य में राष्ट्रपति उन परिस्थितियों में लगाया जाता है जब राज्य में चुनाव के बाद भी कोई पार्टी बहुमत साबित नहीं कर पाती। राष्ट्रपति 6 माह के लिए लगाया जाता है। इसे हर 6 बाद अगले 6 तक बढाया जा सकता है। राष्ट्रपति शासन को अधिकतम 3 वर्ष तक बढाया जा सकता है। महाराष्ट्र में लागू राष्ट्रपति शासन (President Rule In Maharashtra) के दौरान यदि कोई दल राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा पेश करता है तो राज्यपाल अपने विवेक से फैसला ले सकते हैं। इसके लिए दावा पेश करने वाले दल को राज्यपाल के सामने बहुत पेश करना होगा। इसके बाद राज्यपाल उस दल को सरकार बनाने के लिए न्योता दे सकता है।

Bhagat Singh Koshyari
Bhagat Singh Koshyari

अब भी बन सकती है सरकार

महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन (President Rule In Maharashtra) लागू होने के बाद सभी दलों के पास पर्याप्त मौका है। अब कोई भी दल बिना समय की पाबंदी के सरकार बनाने के लिए बहुमत हासिल करने के लिए अन्य दलों से चर्चा कर सकता है। हालांकि महाराष्ट्र में यह पहली बार नहीं हो रहा है। महाराष्ट्र की राजनीति में यह तीसरा राष्ट्रपति शासन है। इससे पहले महाराष्ट्र में सबसे पहला राष्ट्रपति शासन साल 1980 में लगाया गया था। महाराष्ट्र में 17 फ़रवरी 1980 को पहली बार राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था जो 8 जून 1980 तक लगा रहा था। तब तत्कालीन मुख्यमंत्री शरद पवार (Sharad Pawar) को विधानसभा में बहुमत हासिल नहीं हो सका था और विधानसभा भंग हो गई थी।

Political Parties
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राज्य में तीसरी बार लगा राष्ट्रपति शासन

राज्य में दूसरी बार राष्ट्रपति शासन 28 सितंबर 2014 को यानी 34 साल बाद लागू किया गया। साल 2014 में कांग्रेस (Congress), NCP और अन्य सहयोगी दलों से अलग हो गई थी। यह राष्ट्रपति शासन 32 दिनों तक लागू रहा और 30 अक्टूबर 2014 में समाप्त हो गया। महाराष्ट्र में तीसरी बार राष्ट्रपति शासन (President Rule In Maharashtra) लागू किए जाने से पहले राज्यपाल द्वारा हर दल को सरकार बनाने का न्योता भेजा गया। लेकिन सभी दल सरकार बनाने में और बहुमत साबित करने में नाकामयाब रहे। हालांकि इस दौरान भारतीय जनता पार्टी (BJP) पूरी तरह से शांत और इस मामले से दूर नज़र आई। यह बात काफी आश्चर्यजनक प्रतीत होती है। आखिर राज्य में जब इतनी खीचतान भरा माहौल रहा और उसकी सहयोगी पार्टी शिवसेना (Shiv Sena) उससे अलग हो गई तब भी भाजपा की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आना अपने आप में बहुत कुछ कहता है।

अमित शाह का बयान

हालांकि कल यानी 13 नवंबर को पहली बार महाराष्ट्र की राजनीती पर गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने बयान दिया। अमित शाह ने कहा, “महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन (President Rule In Maharashtra) पर विपक्ष की प्रतिक्रिया सिर्फ कोरी राजनीति है। माननीय राज्यपाल जी द्वारा कहीं भी संविधान को तोड़ा-मरोड़ा नहीं गया। दोपहर में NCP द्वारा पत्र लिखकर रात 8 बजे तक सरकार बनाने में असमर्थता जताने के बाद ही राज्यपाल जी ने राष्ट्रपति शासन लगाया है।“

आगे अमित शाह (Amit Shah) बोले, “महाराष्ट्र में राज्यपाल जी ने सभी को पूरा समय दिया। लगभग 18 दिन का समय दिया गया पर कोई भी बहुमत साबित नहीं कर पाया। राज्यपाल जी द्वारा न्योता तब दिया गया जब 09 नवंबर को विधानसभा की अवधी समाप्त हो गयी। आज भी अगर किसी के पास बहुमत है तो वो राज्यपाल से मिल कर दावा कर सकता है।“

उन्होंने कहा कि, “राष्ट्रपति शासन लगाने की आवश्यकता इसलिए भी पड़ी कहीं विपक्ष ये आरोप ना लगाए कि राज्यपाल भाजपा की अस्थायी सरकार को चला रहे हैं। अब सबके पास 6 महीने का समय है अगर किसी के पास बहुमत है तो राज्यपाल से मिल ले। लेकिन एक संवैधानिक पद को इस तरह राजनीति में घसीटना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।“

शिवसेना (Shiv Sena) की शर्त को गलत बताते हुए अमित शाह (Amit Shah) ने कहा, “हम जनादेश का सम्मान करते हैं लेकिन भाजपा महाराष्ट्र में सभी सीटों पर चुनाव नहीं लड़ी, हम गठबंधन में चुनाव लड़े थे लेकिन अब हमारे साथी दल ने ऐसी शर्त रख दी है जो हमको स्वीकार्य नहीं है। पर जो लोग दावा कर रहे हैं कि उनको सरकार बनाने का मौका मिले, तो अब उनके पास मौका है।“

 

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