विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद से ही तीनों राज्यों में मुख्यमंत्री के पद के लिए खींचतान शुरू हुई थी। मध्यप्रदेश में कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच कुर्सी की जंग जारी थी, वहीं राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच कुर्सी के लिए घमासान मचा हुआ था। कांग्रेस के आलाकमान भी मुख्यमंत्री पद की इस जंग में बुरी तरह फंसे थे। आखिर किसे मुख्यमंत्री बनाया जाए इसी सोच ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की नींद तक उड़ा रखी थी। भोपाल और जयपुर में विधायक दल की बैठक के बाद भी जब कोई निष्कर्ष नहीं निकला तो फैसला आलाकमान के ऊपर छोड़ दिया गया।

गहलोत के नाम पर मोहर

आलाकमान ने फोन पर सभी विधायकों से रायशुमारी की, फिर गहलोत और पायलट को दिल्ली बुलाया। दिल्ली में दोनों के साथ बैठक करने के बाद भी कोई फैसला नहीं हो सका। इसके बाद राहुल ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के लिए कमलनाथ और सिंधिया को बुलाया। बैठक खत्म होने के बाद कमलनाथ और सिंधिया भोपाल पहुंचे, जहां रात 11:00 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कमलनाथ के नाम की घोषणा की गई। मध्यप्रदेश को तो अपना मुख्यमंत्री मिल गया लेकिन, राजस्थान में ‘राज’ को लेकर अभी तक जंग छिड़ी हुई थी। एक बार फिर पायलट और गहलोत आलाकमान से मिलने पहुंचे। फिर कई घंटों तक बैठक हुई। इसके बाद अशोक गहलोत के नाम पर आखिर मोहर लग ही गई।

पायलट बने डिप्टी सीएम

पायलट के समर्थकों को समझाने के लिहाज से पायलट को डिप्टी सीएम की कुर्सी थमा दी गई। जैसे ही गहलोत के नाम की घोषणा हुई, वैसे ही उनके समर्थकों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया। पायलट के समर्थकों ने भी बैंड बाजे की धुन पर नाचना शुरू कर दिया। दोनों के समर्थक काफी उत्साह में थे और पूरे प्रदेश में जश्न का माहौल था। गहलोत और पायलट के निवास पर समर्थकों ने खूब आतिशबाजी की, पटाखे फोड़े, मिठाइयां बांटी और ढोल नगाड़े की धुन पर खूब नाचे।

प्रदेश में जश्न

जयपुर स्थित मुख्यालय पर भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस की मौजूदगी में समर्थकों ने जश्न मनाया। तीसरी बार मुख्यमंत्री बने गहलोत के समर्थकों ने कहा कि यह तो सभी जानते थे कि अशोक गहलोत ही मुख्यमंत्री बनेंगे, क्योंकि वे बेहद ही अनुभवी नेता हैं जो सभी को साथ लेकर चलते हैं, और जो पहले भी दो बार राजस्थान की सत्ता संभाल चुके हैं उन्ही को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। अब 17 दिसंबर को गहलोत मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।