कांग्रेस पार्टी (Congress Party) की मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। पहले मनी लांड्रिंग केस में कांग्रेस के दिग्गज नेता और देश के पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम (P. Chidambaram) को CBI ने हिरासत में लिया था। वहीं उसके कुछ दिन बाद ही कर्नाटक कांग्रेस के सबसे शक्तिशाली नेता डी के शिवकुमार (D. K. Shivakumar) सीबीआई के हत्थे चढ़ गए। अब सीबीआई ने एक और दिग्गज कांग्रेसी नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत (Harish Rawat) को अपने शिकंजे में ले लिया है। जी हां हरीश रावत पर विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया गया है। इस मामले में सीबीआई ने हरीश रावत समेत कई अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।

एक और कांग्रेसी नेता शिकंजे में

दरअसल मामला साल 2016 का है जब हरीश रावत (Harish Rawat) के कुछ विधायक कांग्रेस पार्टी (Congress Party) से बगावत कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए थे। सीबीआई ने स्टिंग किए जाने के मामले में त्रिवेंद्र रावत सरकार (Trivendra Singh Rawat) में कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत (Harak Singh Rawat) और स्टिंग में लिप्त टीवी पत्रकार उमेश शर्मा (Umesh Sharma) सहित कई अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। गौरतलब है कि बीती 30 सितम्बर को नैनीताल हाईकोर्ट (Nainital High Court) द्वारा सीबीआई (CBI) को इस मामले में पूरी छूट दे गई थी।

हरीश रावत पर मुकदमा दर्ज

केस दर्ज करने की छूट मिलने के बाद सीबीआई (CBI) ने सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। दरअसल सीबीआई ने 23 मार्च 2016 के विडियो को लेकर सभी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। यह वीडियो उस वक्त है जब राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू था। इस वीडियो में हरीश रावत (Harish Rawat) पार्टी छोड़ चुके बागी विधायकों को मानाने के लिए पैसे के लेन-देन को लेकर बातचीत करते हुए दिखाई दे रहे हैं। हरीश रावत हर कीमत पर अपने नाराज विधायकों को पार्टी में वापस लाना चाहते थे। इस मामले में शामिल हरक सिंह रावत (Harak Singh Rawat) पहले हरीश रावत सरकार में कैबिनेट मंत्री थे, लेकिन बाद में उन्होंने पार्टी का दमन छोड़ भाजपा ज्वाइन कर ली। मौजूदा समय में हराक सिंह भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं।

अदालत को CBI ने सौंपी रिपोर्ट

हरीश (Harish Rawat) और हरक (Harak Singh Rawat) के अलावा नोएडा स्थित एक समाचार चैनल समाचार प्लस के प्रधान संपादक उमेश शर्मा (Umesh Sharma) के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया है। वहीं सीबीआई (CBI) ने वीडियो की जांच के लिए उसे गुजरात के गांधीनगर की फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला भेजा था। जांच के बाद इस बात की पुष्टि की गई कि वीडियो पूरी तरह से वास्तविक है और उसमें किसी भी तरह की कोई कांट-छांट या छेड़छाड़ नहीं की गई है। अपनी जांच के बाद उत्तराखंड की उच्च न्यायालय के समक्ष सीबीआई ने एक सीलबंद लिफ़ाफ़े में अपनी रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट के बाद उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने आदेश जारी करते हुए सीबीआई को जांच आगे बढाने और सभी आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज करने को कहा है।

 

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