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भारत ने चंद्रयान मिशन को सफल बनाकर अपने नाम का डंका पूरी दुनिया के सामने बजा दिया था। एक बार फिर भारत चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) के साथ दुनिया को चुनौती देते हुए मैदान में खड़ा है। चंद्रयान-2 को ISRO ने 22 जुलाई को प्रेषित किया था जो चंद्रमा की सतह पर 7 सितम्बर को उतरेगा। चंद्रयान-2 के चांद पर उतरने की घटना को पूरी दुनिया लाइव देख सकती है। आइये आपको बताते है चंद्रयान-2 से जुडी कुछ ख़ास बाते।

chandrayaan-2

 

दक्षिणी ध्रुव : ऐसी जगह जहां सूर्य की किरणें नहीं पहुंच पाती
चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सूर्य की किरणें तिरछी पड़ती हैं जिस वजह से वहा का तापमान कम होता है। ISRO के ट्रेनिंग इंचार्ज तरुण शर्मा का कहना है कि चांद के जिस हिस्से में सूरज की किरण नहीं पहुचती वहां तापमान 130 डिग्री सेल्सियस से नीचे होता है। यही कारण है कि वहां पानी मिलने की संभावना सबसे ज्यादा है। और जहां पानी होगा वहा जीवन होने की संभावना भी होगी। चंद्रमा पर पानी की खोज करना ही चंद्रयान-2 का एक मात्र लक्ष्य है।

कई देशों के मुकाबले हमारा मिशन सस्ता

यान लागत
चंद्रयान-2 978 करोड़ रुपए
बेरशीट (इजराइल) 1400 करोड़ रुपए
चांग’ई-4 (चीन) 1200 करोड़

पूरी दुनिया लाइव देखेगी चंद्रयान-2

भारत के चंद्रयान-2 मिशन पर पूरी दुनिया की नज़र टिकी हुई है। चंद्रयान-2 इसलिए भी दुनिया की नज़रो में है क्योकि इसे भारत ने बहुत कम लागत में बनाया है। साथ ही चंद्रयान-2 में लगने वाले उपकरण भारत में तैयार किये गए है। बता दे कि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसरो मुख्यालय में बैठकर चंद्रयान-2 के चांद पर उतरने की घटना को लाइव देखेंगे। प्रधानमंत्री मोदी के साथ-साथ चंद्रयान-2 को 70 स्कूलो से बच्चे एक साथ देखेंगे और इस मिशन के गवाह बनेंगे।

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