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भारत का मिशन चंद्रयान 2 (Chandrayaan-2) बीते 7 सितंबर को आखिरी क्षणों में फेल हो गया था। भारत के इस मिशन ने 90% सफलता प्राप्त कर ली थी। लेकिन लैंडिंग के कुछ ही क्षण पूर्व लैंडर विक्रम (Lander vikram) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) से टूट गया और वह सॉफ्ट लैंडिंग (Soft Landing) करने में असफल रहा। इसके बाद इसरो सेंटर में मौजूद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) ने इसरो चीफ के सिवान (Kailasavadivoo Sivan) को हिम्मत दी और कहा कि यह भारत की आंशिक असफलता है। उन्होंने कहा कि भले ही लैंडर विक्रम सॉफ्ट लैंडिंग करने में विफल हो गया लेकिन, भारत ने वो कर दिखाया है जो आज तक कोई भी देश नहीं कर सका। उन्होंने कहा था कि ये वक्त निराश होने का नहीं बल्कि इससे सीख लेकर आगे और अधिक प्रयास कर सफलता पाने का है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) द्वारा कही गई इस बात से न सिर्फ इसरो चीफ (ISRO Chief) के सिवान (Kailasavadivoo Sivan) को हिम्मत आई बल्कि उन्होंने उसी वक़्त से मिशन चंद्रयान 3 (Chandrayaan-3) की तयारी भी शुरू कर दी थी। अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने एक बार फिर से चांद की सतह पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग (Soft Landing)’ की तैयारी कर ली है। इस बात की जानकारी देते हुए ISRO के अधिकारी ने कहा कि अगले साल यानी 2020 के नवंबर माह में चंद्रयान 3 को प्रक्षेपित किया जा सकता है। बता दें कि इसरो ने तिरुवनंतपुरम स्थित ‘विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र’ के निदेशक एस सोमनाथ की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था।

Chandrayaan-2

 

यह उच्चस्तरीय समिति चंद्रयान 3 पर रिपोर्ट तैयार करने के लिए गठित की गई थी। ‘विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र’ सभी प्रक्षेपण यान कार्यक्रमों का दायित्व संभालने वाला सबसे अग्रणी केंद्र है। अब इसरो को इस समिति की रिपोर्ट का इंतजार है। इसरो के अधिकारी की तरफ से जानकारी दी गई है कि फिलहाल रिपोर्ट का इन्तजार किया जा रहा है। इतना ही नहीं समिति को अगले साल के अंत तक चंद्रयान -3 (Chandrayaan 3) के प्रक्षेपित किए जाने की पूरी तैयारी करने के दिशा-निर्देश भी दिए गए हैं। अपनी जानकारी में अधिकारी ने आगे कहा कि अगले साल का नवंबर माह प्रक्षेपण की द्रष्टि से सबसे सही समय रहेगा।

अधिकारी ने आगे जानकारी देते हुए कहा कि, “चंद्रयान 2 (Chandrayaan-2) के समय हुई गड़बड़ी को न दोहराया जाए इस बात का ख़ास ख्याल रखा जा रहा है। इस बार इसरो रोवर, लैंडर और सॉफ्ट लैंडिंग (Soft Landing) की प्रक्रिया पर पूरा ध्यान दे रहा है। पिछली बार सॉफ्ट लैंडिंग में क्या चूक हुई इसका अच्छी तरह से विश्लेषण किया गया है। पिछले मिशन में हुई गड़बड़ियों और खामियों को दूर किया जाएगा ताकि इस बार सॉफ्ट लैंडिंग सफलता से की जा सके।”

 

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