चीन अंतरिक्ष महाशक्ति बनने की ओर कदम बढ़ा चुका है। चीन ने शनिवार 8 दिसंबर को अपने के रोवर को प्रक्षेपित किया है जो चांद की दूसरी तरफ की सतह पर उतरेगा, जहां अभी तक कोई भी यान नहीं पहुंच सका। वैश्विक स्तर पर यह पहला प्रक्षेपण है। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी ने जानकारी दी है कि चीन ने यह प्रक्षेपण अपने दक्षिण-पश्चिमी शिचांग के प्रक्षेपण केंद्र से किया है, और चांद पर अपने ‘चांग‘ई-4’ यान को लॉन्ग मार्च 3बी रॉकेट के माध्यम से प्रक्षेपित किया है।

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चीन ने लांच किया ‘चांग‘ई-4’

चीन ने अपने चंद्रयान का नाम चीनी पौराणिक कथाओं की देवी के नाम पर रखा है। चीनी पौराणिक कथाओं में देवी का नाम चन्द्रमा देवी है और इसी वजह से चीन ने अपने चंद्रयान का नाम ‘चांग‘ई-4’ रखा है। इस प्रक्षेपण के साथ ही चंद्र अन्वेषण मिशन की सबसे लम्बी यात्रा शुरु हुई जो चांद के दूसरी तरफ के हिस्से में किया जाएगा। इस अन्वेषण के माध्यम से चांद के अज्ञात हिस्से का पता चल पाएगा जहां अभी तक कोई चंद्रयान नहीं पहुंचा है।

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सोवियत संघ ने ली थी पहली तस्वीर

नए साल के आसपास इस चंद्रयान के चांद की दूसरी सतह पर उतरने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे पहले सोवियत संघ द्वारा चांद के दूसरी तरफ (जहां अंधेरा होता है), की पहली तस्वीर ली गई थी। इस तस्वीर से कई रहस्यों पर से पर्दा उठा था लेकिन पूरी जानकारी नहीं मिली थी। तस्वीर से पता चला था कि चांद की दूसरी तरफ पहाड़ी क्षेत्र है और वहां की सतह बेहद ही ऊबड़-खाबड़ है।

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चांद की दूसरी तरफ यान भेजने वाला पहला देश

पहली बार 1959 में यह रहस्य सामने आया था और पता चला था कि इस सतह पर उतरना बिल्कुल भी आसान नहीं है, लेकिन चीन ने इसी सतह को अन्वेषण के लिए चुना है और अपना चंद्रयान रवाना भी कर दिया है। अभी तक दुनिया का कोई भी चंद्रयान चांद की इस सतह पर नहीं उतर सका और ना ही किसी देश ने इस हिस्से पर अन्वेषण करने का साहस दिखाया। ऐसे में चीन चन्द्रमा की विमुख सतह पर यान भेजने वाला विश्व का पहला देश बन गया है।