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नेपाल दौरे पर आखिर क्यों भड़के शी जिनपिंग?

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) दो दिवसीय भारतीय दौर के बाद रविवार 13 अक्टूबर को नेपाल के दौरे (Nepal Tour) पर पहुंचे। शी जिनपिंग 23 सालों में नेपाल का दौरा करने वाले पहले चीनी राष्ट्रपति है। नेपाल के दौरे पर गए चीनी राष्ट्रपति ने चेतावनी देते हुए कहा कि जो भी चीन को तोड़ने की कोशिश करेगा उसे कुचल कर रख दिया जाएगा। चीन को तोड़ने की कोशिश करने वालों की हड्डी-पसली तोड़ दी जाएंगी।

नेपाल को 50 करोड़ डॉलर की सहायता

हालांकि नेपाल के दौरे (Nepal Tour) के दौरान शी जिनपिंग (Xi Jinping) ने नेपाल को 50 करोड़ डॉलर की आर्थिक सहायता प्रदान करने का ऐलान किया और 20 समझौतों पर हस्ताक्षर किए। लेकिन इस दौरान उन्होंने देश के दुश्मनों पर जमकर हमला बोला। जिनपिंग ने किसी भी देश का नाम लिया बिना उन्हें बेहद कड़ी चेतावनी दी। शी जिनपिंग ने कहा कि किसी भी विदेशी ताकतों की चीन को तोड़ने की कोशिश दिन में सपने देखना जैसा होगा जिसमे वे कभी सफल नहीं हो सकते। हां लेकिन ऐसी कोशिश करने वालों को चीन दिन में तारे जरूर दिखा देगा।

तिब्बती समूहों ने किया विरोध

गौरतलब है कि हॉन्ग कॉन्ग में बीते सप्ताह लोकतंत्र के समर्थन में जमकर प्रदर्शन किया गया था। इस प्रदर्शन को अमरीका और तमाम पश्चिमी देशों ने समर्थन दिया है। अमरीका सहित तमाम तमाम पश्चिमी देश चीन के अल्पसंख्यक समुदाय उइगर के प्रति अनुचित बर्ताव को लेकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। जिनपिंग ने उन्हीं देशों को खुली चेतावनी दी है। वहीं जिनपिंग (Xi Jinping) का ये गुस्सा तिब्बतियों के लिए भी माना जा रहा है। बता दें कि नेपाल (Nepal Tour) में लगभग 20 हजार तिब्बती रहते हैं और जिनपिंग के नेपाल दौरे पहुंचने पर कुछ तिब्बती समूहों ने चीन का विरोध प्रदर्शन भी किया।

चीन के शासन से नाराज तिब्बती

दरअसल चीन ने सन 1950 में तिब्बत में अपनी सेना तैनात की थी और तभी से चीन यहां  शासन कर रहा है। तिब्बती अध्यात्मिक गुरु दलाई लामा (Dalai Lama) ने इस चीनी शासन का कड़ा विरोध किया था। इसी वजह से उन्हें सन 1959 में तिब्बत से भागना पड़ा था। दलाई लामा तिब्बत से भागकर भारत की शरण में आए थे। भारतीय शरण में रहने वाले दलाई लामा को बीजिंग के अधिकारी खतरनाक प्रतिक्रियावादी के तौर पर देखते हैं जो चीन के महत्वपूर्ण क्षेत्र का बंटवारा करना चाहते हैं।

अमरीका की चीन को चेतावनी

नेपाल दौरे (Nepal Tour) पर गए शी जिनपिंग (Xi Jinping) ने हॉन्ग कॉन्ग में फैली इस अशांति में विदेशी ताकतों का हाथ बताया। हॉन्ग कॉन्ग में को लेकर अमरीका ने चीन को चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि चीनी अधिकारी कोई भी गलती करते हैं, या अल्पसंख्यक समुदाय उइगर के प्रति खराब बर्ताव करते हैं तो उसके साथ किसी भी तरह की व्यापार वार्ता नहीं की जा सकती।

28 चीनी कम्पनियों को किया ब्लैकलिस्ट

गौरतलब है कि चीन के शिनजियांग प्रांत के अल्पसंख्यक समुदाय को प्रशिक्षण केन्द्रों के नाम पर कैद में रखने और उन पर तमाम तरह के प्रतिबंध लगाने को लेकर बीजिंग की पूरी दुनिया में आलोचना हो रही है। इसी वजह से अमरीका ने बीते सप्ताह ही चीन की 28 कम्पनियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया था।

 

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