BJP और Shivsena में मध्यस्थता करा सकता है RSS

महाराष्ट्र में नई सरकार के गठन को लेकर अभी तक शिवसेना (Shiv Sena) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) अभी तक एक जुट नहीं हो सकी हैं। दरअसल शिवसेना जहां 50-50 फ़ॉर्मूले पर अड़ी है वहीं भाजपा ढाई साल के मुख्यमंत्री पद के लिए तैयार नहीं है। ऐसे में दोनों दलों के बीच मामला उलझा हुआ है। गौरतलब है कि बीती 21 अक्टूबर को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए मतदान किया गया था और 24 अक्टूबर को चुनाव नतीजे घोषित किए गए थे।

महाराष्ट्र विधानसभा में कुल 288 सीटें हैं। किसी भी दल को बहुमत के लिए 145 सीटों की आवश्यकता है। वहीं इस चुनाव में जहां भाजपा (BJP) ने सबसे बड़े दल के रूप में 105 सीटें हासिल की तो वहीं शिवसेना (Shiv Sena) के खाते में 56 सीट गई। इस चुनाव में एनसीपी (NCP) ने 54 और कांग्रेस (Congress) ने 44 सीटों पर जीत हासिल की है।

चुनाव परिणाम के बाद से ही भाजपा (BJP) और शिवसेना (Shiv Sena) के बीच कुर्सी की लड़ाई जारी है। हालांकि मंगलवार सुबह भाजपा की कोर ग्रुप की एक शीर्ष बैठक मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) के आवास पर बुलाई गई थी। इस बैठक के बाद प्रदेश वित्त मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता सुधीर मुनगंटीवार (Sudhir Mungantiwar) ने प्रेस वार्ता में कहा कि किसी भी क्षण प्रदेश में नई सरकार के गठन की खबर आ सकती है। इसके बाद शाम को अचानक मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) नागपुर स्थित संघ मुख्यालय (RSS Headquarters) पहुंचे।

Mohan Bhagwat से मिलने पहुंचे Devendra Fadnavis

यहां देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने संघ प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) से मुलाक़ात की। इस बैठक को राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। इस बैठक के बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि अब बेहद जल्द दोनों दलों के बीच सहमती बन जाएगी और प्रदेश में नई सरकार का गठन होगा। इससे पहले शिवसेना (Shiv Sena) के एक वरिष्ठ नेता किशोर तिवारी (Kishore Tiwari) ने संघ प्रमुख भागवत और बीजेपी के सीनियर नेता और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) को ख़त लिखकर मदद मांगी थी।

शिवसेना (Shiv Sena) के नेता ने अपने ख़त के बारे में जानकारी देते हुए कहा था कि, हमने संघ प्रमुख और केन्द्रीय मंत्री गडकरी (Nitin Gadkari) से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने कहा था कि हमे पूरा विश्वास है कि नितिन गडकरी न सिर्फ गठबंधन धर्म का सम्मान करेंगे बल्कि मात्र दो घंटे के अंदर ही इस स्थिति को सुलझा लेंगे। गौरतलब है कि इससे पहले प्रदेश वित्त मंत्री सुधीर मुनगंटीवार (Sudhir Mungantiwar) ने कहा था कि प्रदेश में 9 नवंबर से राष्ट्रपति शासन लागू हो जाएगा। उनकी इस बात को शिवसेना ने धमकी के तौर पर लिया और अगले दिन अपने मुख्यपत्र सामना में लिखा था क्या राष्ट्रपति भाजपा (BJP) की जेब में हैं?

बता दें कि महाराष्ट्र में मौजूदा सरकार का कार्यकाल 8 नवंबर को समाप्त हो जाएगा। यदि उससे पहले दोनों दलों के बीच सहमति नहीं बनती और नई सरकार का गठन नहीं होता तो संविधान के अनुसार राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हो जाएगा। इसी बात का जिक्र सुधीर मुनगंटीवार (Sudhir Mungantiwar) ने किया था।

 

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