टिकट के लिए लड़ाई

कांग्रेस पार्टी ने नारा दिया था वक्त है बदलाव का। पार्टी का यह नारा आज उसी के कार्यकर्ताओं ने उत्तरप्रदेश के रुड़की में सार्थक कर दिया। जी हां आज कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता टिकट के लिए मारपीट करते नज़र आए। आगामी लोकसभा चुनाव में टिकट बंटवारे को लेकर कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता गुरुवार को रुड़की में आपस में भिड़ गए। कांग्रेस कार्यकर्ताओं में बदलाव की बयार चली तो लात, घूसों और थप्पड़ों की बारिश हो गई। तकरीबन 10 मिनट तक पार्टी कार्यकर्ताओं ने एक दूसरे की जमकर खिदमद की। जिसे जो समझ आया, जैसा समझ आया वैसी आवभगत कर डाली।

दरअसल आगामी लोकसभा चुनाव के लिए टिकट बंटवारे को लेकर कांग्रेस पार्टी अपने कार्यकर्ताओं से उनकी राय जानना चाहती थी। इसके लिए कांग्रेस पार्टी के आलाकमान ने हरिद्वार लोकसभा का पूरा जिम्मा पूर्व सांसद महेंद्र पाल को सौंप दिया। जब जिम्मेदारी मिली तब महेंद्र पाल टिकट बंटवारे को लेकर कार्यकर्ताओं की राय जानने रुड़की पहुंचे। महेंद्र ने बारी-बारी से, एक साथ 8-10 कार्यकर्ताओं को एक बंद कमरे में बुलाया और उनकी राय जानी। इस तरह महेंद्र पाल तकरीबन 100 कार्यकर्ताओं से बात कर पाए थे। इसके बाद जैसे ही उन्होंने अगले कार्यकर्ताओं को कमरे में बुलाकर बात शुरू की, तो कमरे के बाहर मौजूद कार्यकर्ताओं ने हंगामा शुरू कर दिया। बाहर मौजूद कार्यकर्त्ता नारेबाजी करने लगे।

दरअसल पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और पूर्व राज्य मंत्री संजय पालीवाल के समर्थक, अपने-अपने नेताओं के समर्थन में यह नारेबाजी कर रहे थे। हालांकि यह सामान्य थी, लेकिन तभी संजय के समर्थकों ने कहा कि, हरीश रावत जिंदाबाद नहीं मुर्दाबाद बोलो। संजय के समर्थकों का इतना कहना हुआ कि, रावत के समर्थक आग बबूला हो उठे। इस बात से नाराज रावत समर्थकों ने बहस शुरू कर दी। पलक झपकते ही बहस मारपीट में बदल गई।

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दोनों के समर्थकों ने आव देखा न ताव और एक-दूसरे पर टूट पड़े। इसके बाद तो वहां दंगल हो गया। गुस्से से तिलमिलाए रावत समर्थकों ने संजय के समर्थकों को अच्छी तरह से धुना। भला संजय के समर्थक कहां चुप बैठने वाले थे। उन्होंने भी करार जवाब देते हुए रावत समर्थकों पर धावा बोल दिया। गांधी पार्टी अहिंसा को त्याग हिंसा पर उतर आई। किसी ने किसी के बाल नोचे तो किसी ने किसी के गाल को लाल कर दिया। लात, घूसों और थप्पड़ों का यह दौर तकरीबन 10 मिनट तक चला। तबियत से दोनों के समर्थकों ने एक दूसरे की मेहमाननवाजी की। इसके बाद वरिष्ठ पदाधिकारियों ने बीच-वाचाव कर मामले को शांत करवाया।

 

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