DoomsDay Argument

मानव सभ्यता कब तक इस धरती पर रहेगी क्या आपको यह पता है ? अगर इस धरती पर रहने वाले सभी जिव के विनाश के टाइम को एक अल्गोरिथम माना जाये तो निश्चित काल के बाद हमारी सभ्यता का अंत हो जायेगा। इसी डरावने विचार को Doomsday नाम दिया गया है। Doomsday Argument का आसन शब्दों में समझे तो, धरती पर किसी भी सभ्यता या प्राणी का लुप्त होना Doomsday कहलाता है। इसे एसा भी कहा जा सकता है कोई बड़ा विनाश या बह्यंकर आपदा जिसके कारण प्रथ्वी पर रहने वाले सभी जिव और सभ्यता के जीवन का पूरी तरह से नष्ट हो जाना।

कहा गायब हो गया विज्ञान

mohenjo-daro-doomsday-in-hindimohenjo-daro-doomsday-in-hindi

हम मनुष्यों को लगता है की हमने आज साइंस में बोहोत उन्नति कर चुके है और हमने अपने भूतकाल को बोहोत कुछ समझ लिया है, लेकिन अगर धरती के इतिहास को समझा जाये तो हमे कुछ और संकेत भी मिलते है। जिस प्रकार धरती पर रहने वाले कई विशाल प्राणी जैसे डाएनासौर और प्राचीन प्रजातीया जैसे होमो सेपियंस, हड़प्पा और मोहन जोदड़ो एसी प्राचीन संपन्न सभ्यताए अचानक लुप्त हो गई है, कुछ के कारण तो हमे पता है जैसे उल्का पात या परमाणु युद्ध इसका कारण रहे होंगे लेकिन पक्के तोर पर हम आज भी इस बात को नहीं समझ पाए की यह प्रजातिया एक दम से कहा गायब हो हुई।

क्या है Copernicus Theory

copernicus-theory-in-hindi
Copernicus Theory

यह वास्तव में एक भ्रमांड विज्ञानं की अवधारणा पर आधारित है जिसे कोपरनिकन सिधांत कहा जाता है। कोपरनिकन एक व्यक्ति था जिसने एसा विचार का प्रस्ताव किया था की प्रथ्वी सूर्य के चारो ओर घुमने वाले कई ग्रहों में से एक है। कोपरनिकन के इस विचार का बहिष्कार भी हुआ लेकिन जब हमने भ्रमांड के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त की तो हमने पाया की हमारी प्रथ्वी की जगह बोहोत विशेष और अनोखी है जितना हमने कभी सोचा भी नहीं था। जैसे धरती का अपने एक्सिस पर 23डिग्री झूका होना, सूर्य से धरती की दुरी और धरती से चाँद की दुरी.. ओंर एसे कई कारणों की वजह से धरती पर जीवन संभव हो सका है।

मानव सभ्यता का अंत कब होगा ?

dinosaurs-doomsday-in-hindi

हमे यह कभी नहीं भूलना चैहिये की एक दिन धरती पर रहने वाले सभी जीवो का अंत होगा, क्योकि हर सभ्यता कुछ निश्चित काल के बाद लुप्त हो जाती है। तो अगर हम इसे गड़ीतीय भाषा में समझे और हम अंदाजा लगाना चाहे की हमारी मानव प्रजाति का अंत कब होगा तो ज्ञात तथ्यों और DNA साक्ष्य के अनुसार जिस प्रकार होमो सेपियंस प्रजाति 3,50,000 वर्षो पहले इस धरती पर रहती थी। रामायण काल और महाभारत काल इन दोनों के बिच 7,000 साल से 9,000 साल का अंतर था। इससे हम यह अंदाजा लगा सकते है की एक पूरी सभ्यता का अंत 7000 से 9000 साल में हो जाता है। महाभारत काल और रामायण काल के बाद भी कई सभ्यता आई जैसे मोहन जोदड़ो, हड़प्पा, आदि। इन सभी सभ्यताओ का कुछ विशेष समय काल के बाद अंत हो गया था।

doomsday-argument-in-hindi

तो हमारी सभ्यता का अंत कब होगा ? क्या यह कोई काल खंड में विभाजित है ? वो कितना समय होगा ? और अगर हमारी सभ्यता का अंत होने वाला है तो हम अपनी आगे आने वाली नइ सभ्यता को अपना ज्ञान विज्ञानं कैसे दे। जिस प्रकार पुरानी सभ्यता ने हमे बड़े बड़े निर्माण करके और ग्रंथो की रचना करके हमे टेक्नोलॉजी देने की कोशिश की लेकिन फिर भी रामायण और महाभारत काल में कई उड़ने वाले विमान और उनका विज्ञानं उनके साथ लुप्त हो गए, और पुरानी सारी सभ्यताओ का विज्ञानं और खोज उन्ही के साथ नष्ट हो गया और हमे नए सिरे से शुरवात करनी पड़ी। वैसे ही जब हमारी सभ्यता का अंत होगा तब हम कितनी कोशिश कर ले हमारी टेक्नोलॉजी को आगे आने वाली सभ्यता को देने की लेकिन वो टेक्नोलॉजी पाकर भी नई सभ्यता को नए सिरे से शुरवात करेगी और यही अंत समय की अवधि को ही Doomsday कहा जाता है।

ताजा जानकारी पाने के लिए जुड़े रहिये BNR News के साथ।

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *