राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का राजनीति से सीधा कोई संबंध नहीं है, लेकिन भारत में ये स्वयंसेवी संस्था ना केवल राजनीतिक बल्कि सामजिक परिवेश में भी महत्वपूर्ण स्थान है. देश की सत्ता बनाने और बिगाड़ने की ताकत आरएसएस (RSS) रखता है, यही वजह है कि बीजेपी के दिग्गज नेता और मोदी सरकार के मंत्री भी संघ के आगे नतमस्तक नजर आते हैं.

देश भर में आरएसएस विजयदशमी पर अपना स्थापना दिवस मना रहा है. इस मौके पर ये समझना जरूरी है कि आखिर संघ की स्थापना कैसे और कब हुई? और किस तरह ये संगठन अपने आपको 9 दशक बाद दुनिया के सबसे बड़े संगठन के रूप में स्थापित कर पाया?

विजयदशमी यानी दशहरे के दिन ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नींव रखी गई थी. दिन था 27 सितंबर, 1925 जब दशहरे के मौके पर नागपुर के मोहता के बाड़े नामक जगह पर डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार ने आरएसएस की नींव रखी थी. ये RSS की पहली शाखा थी जो संघ के पांच स्‍वयंसेवकों के साथ शुरू हुई थी. आज पूरे देश में 50 हजार से अधिक शाखाएं हैं. आइए जानें- आरएसएस से जुड़ी कुछ और जानकारियां.

आपको बता दें कि सबसे पहले 50 साल बाद 1975 में जब आपातकाल की घोषणा हुई तो तत्कालीन जनसंघ पर भी संघ के साथ प्रतिबंध लगा दिया गया. आपातकाल हटने के बाद जनसंघ का विलय जनता पार्टी में हुआ और केन्द्र में मोरारजी देसाई की मिलीजुली सरकार बनी. तब से धीरे-धीरे इस संगठन का राजनैतिक महत्व बढ़ता गया और इसी के फलस्वरूप भाजपा जैसे राजनैतिक दल को जीवन मिला जिसे आमतौर पर संघ की राजनैतिक शाखा के रूप में देखा जाता है.

संघ की स्थापना के 75 वर्ष बाद सन् 2000 में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए गठबंधन की सरकार बनी. फिर 2014 में संघ की छत्रछाया में एक बार फिर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनी, जो कि इस साल 2019 में अपने दूसरे कार्यकाल में है.

संघ में संगठनात्मक रूप से सबसे ऊपर सरसंघचालक का स्थान है. सर संघचालक की नियुक्ति मनोनय द्वारा होती है. हर सरसंघचालक अपने उत्तराधिकारी की घोषणा करता है. वर्तमान में संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत हैं.

संघ में शाखा का खास रोल है जिसमें सार्वजनिक स्थानों पर सुबह या शाम के समय एक घंटे के लिये स्वयंसेवक मिलते हैं. वर्तमान में पूरे भारत में संघ की लगभग 55 हजार से ज्यादा शाखा लगती हैं. असल मायने में शाखा संघ की बुनियाद मानी जाती है. जिसके बल पर इतना विशाल संगठन खड़ा हुआ है. शाखा की सामान्य गतिविधियों में खेल, योग, वंदना और भारत एवं विश्व के सांस्कृतिक पहलुओं पर बौद्धिक चर्चा-परिचर्चा शामिल है.

जानें- आरएसएस के बारे में ये तथ्य:

संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार
स्थापना वर्ष- विजयदशमी, 1925
मुख्यालय- नागपुर (महाराष्ट्र)
वर्तमान प्रमुख: मोहन भागवत, सरसंघचालक
उद्देश्य- हिंदू राष्ट्रवाद और हिंदू परंपराओं को कायम रखना
ये है वेबसाइट- rss.org

ऐसे लगती है शाखा

आरएसएस की शाखा मैदान या खुली जगह पर लगती है. शाखा में व्यायाम, खेल, सूर्य नमस्कार, समता (परेड), गीत और प्रार्थना होती है. ये शाखाएं प्रभात, सायं, रात्रि, मिलन, संघ मंडली के नाम से जानी जाती हैं.

संघ पर तीन बार लगा प्रतिबंध

संघ ने अपने लंबे सफर में कई उपलब्धियां अर्जित कीं जबकि तीन बार उसपर प्रतिबंध भी लगा. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या को संघ से जोड़कर देखा गया. संघ के दूसरे सरसंघचालक गुरु माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर को बंदी बनाया गया. लेकिन 18 महीने के बाद संघ से प्रतिबंध हटा दिया गया. दूसरी बार आपातकाल के दौरान 1975 से 1977 तक संघ पर पाबंदी लगी. तीसरी बार छह महीने के लिए 1992 के दिसंबर में लगी, जब 6 दिसंबर को अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिरा दी गई थी.

भागवत ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की

उन्होंने कहा कि इस देश की जनता ने प्रत्यक्ष चुनाव के निर्णय लिए, इसके चलते वह परिपक्वा हुई है। जनता ने 2014 की अपेक्षा इस बार सरकार को ज्यादा बहुमत दिया। यह भी साबित हुआ है कि सरकार अनुच्छेद 370 हटाने जैसा कठोर निर्णय लेने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार ने यह फैसला लोकसभा और राज्यसभा में आमचर्चा के माध्यम से किया। सभी दलों ने इसे जो समर्थन दिया, प्रधानमंत्री का यह कार्य अभिनंदनीय है।

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