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वीमानिक शाश्त्र पर आधारित एंटी ग्रेविटी यान

यदि हम एंटी ग्रेविटी यान या प्लेन बना ले तो क्या-क्या संभव हो सकता है, और उससे हमे क्या-क्या फायदे होंगे। हमने जितने भी यूएफओ के वीडियो देखे है उसमे आपने कभी हेकोप्टर जैसे कोई पंख नहीं देखे होंगे। और न ही हवाईजहाज जैसे इंजन। यहाँ तक की उसमे कोई राकेट जैसा एग्जॉस्ट भी नहीं लगा होता। फिर भी वह इतनी तेजी से उड़ सकते है और किसी भी दिशा में मुड़ सकते है। और उन्हें देखकर ऐसा लगता है जैसे उन पर ग्रेविटी का असर ही नहीं ही रहा हो और जैसे वो हवा में तेर रहे हो। तो कभी अचानक ही गायब हो जाते है अर्थात लाइट की गति से ट्रेवल करने लगते है। मानो उनके लिए फिजिक्स के कोई रूल लागु ही नहीं हो रहे हो।

vaimaniki shashtra made antigravity plane in india

 

जब मेने इंटरनेट पर ऐसे वीडियो को देखा तो मुझे भी बहुत आश्चर्य होता था और लगने लगा था कि यह सब वीडियो फेक और एडिटिंग से बनाये गए है। जैसे कि कई हॉलीवुड मूवी में ग्राफ़िक्स इफ़ेक्ट से पिक्चर बनाई जाती है। उसी प्रकार यह वीडियो भी बनाये गए होंगे। फिर मेने जब और रिसर्च की और कई न्यूज़ पपेर के आर्टिकल पढ़े तो पता चला कि कई बड़े न्यूज़ पेपर जैसे CNN, BBC और London Times ने भी यूएफओ (UFO) के बारे में वर्णन किया था। न्यूज़ पेपर के अनुसार यूएफओ को जिन लोगो ने देखा था उन्होंने बताया की उनके यान बहुत हलकी सी आवाज़ करते है जो कि एक वाइब्रेशन जैसी फील होती है पर आवाज़ सुनाई नहीं देती। जिस प्रकार म्यूजिक में हाई बेस होता है तो उसकी धमक का अहसास होता है। वह आवाज़ कुछ उसी प्रकार की महसूस होती है पर यह समझ नहीं आती।

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क्या एलियन होते है ?

एलियन होते है या नहीं आप में से बहुत से लोग यह सोचते होंगे। तो आपको बता दूं कि परग्रही जरूर होते होंगे। इतने अनंत ब्रह्माण्ड में ऐसे कोई न कोई गृह जरूर होंगे जहां हमसे बहुत ज्यादा एडवांस परग्रही सभ्यता जरूर रहती होगी। वैज्ञानिको ने जब ओबज़ेरेबल ब्रह्माण्ड को देखा तो पाया कि हमारी धरती से ज्यादा अनुकूल स्टार सिस्टम ब्रह्माण्ड में मौजूद है।

अनुकूल स्टार सिस्टम यानी ऐसा सूर्यमण्डल जैसे की हमारा सूर्यमण्डल है। जिसमे सूर्य से पृथ्वी की दूरी इतनी हो जिसमे पानी लिक्विड फॉर्म में रह सके। वैज्ञानिको ने ऐसे कई सारे स्टार सिस्टम ढूंढ लिए है जो हमारी पृथ्वी से ज्यादा अनुकूल हैं और उनका सूर्य हमारे सूर्य से ज्यादा अच्छा तारा भी है। जिसकी लाइफ या आयु हमारे सूर्य से करोड़ो साल ज्यादा होगी।

ऐसे बहुत से स्टार सिस्टम और हैं जहा परग्रही लाइफ संभव है। जब मैंने और रिसर्च किया कि आखिर एलियन के विमान किस प्रकार की तकनीक का प्रयोग करते होंगे तो विमानिक शास्त्र में बताया गया है कि पारे धातु के उपयोग से या उसके जैसा लिक्विड हैवी मेटल का उपयोग करके विमानों को चलाया जा सकता है। जिस प्रकार यूएफओ चलते है और अचानक गति बढ़ा लेते हैं, तो हो सकता है कि वो इसी प्रकार के किसी हैवी मेटल या ब्लैक होल से कंप्रेस किए हुए मेटल का उपयोग करके खुद के यान की ग्रेविटी बना लेते होंगे जो दूसरे गृह की ग्रेविटी से ज्यादा होती होगी। और ग्रेविटी की दिशा बदलकर यान की दिशा को भी बदल लेते होंगे।
जिस प्रकार हम ऑक्सीजन को कंप्रेस करके लिक्विड ऑक्सीजन बनाते है उसी प्रकार एलियन भी एडवांस तकनीक की मदद से मेटल को कंप्रेस करके खुद की ग्रेविटी का निर्माण करते है जो किसी भी गृह की ग्रेविटी के खिलाफ एंटी ग्रेविटी का काम करती होगी।

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आइए जाने कि हम कैसे एसे स्पेस क्राफ्ट को बनाएं जो प्रकाश की गति के समकक्ष पहुच सके

साउंड और वाइब्रेशन जो हमारे आध्यात्म का एक अभिन्न अंग है जैसे रामायण और महाभारत में कोई विशेष बाण चलाने के लिए पहले मंत्र पढ़ते थे जिससे साधारण बाण भी बह्रमास्त्र जैसे महाशक्तिशाली बाण में बदल जाता था। जैसे की गायत्री मंत्र। गायत्री मंत्र वैज्ञानिक दृष्टिकोण से एक बहुत शक्तिशाली मंत्र है। इसके उच्चारण करने से शरीर में जो वाइब्रेशन होता है उससे हमारे दिमाग में एक विशेष प्रकार की लहर उत्पन्न होती है। और शरीर में स्थित चक्र एक्टिव होने लगते है। गायत्री मंत्र को जब डॉक्टर होवार्ड स्टेनग्रील ने रिसर्च किया तो पाया की गायत्री मंत्र जपने से 66 लाख Hz की अल्ट्रा साउंडवेव जनरेट होती है। आपको बता दे की साउंड जितना ज्यादा होगा तो उसका वाइब्रेशन भी उतना ज्यादा होगा। यदि हम 11 हज़ार डेसीबल का साउंड उत्पन्न कर ले तो एक ब्लैक होल बन जायेगा। लेकिन आज के साइंस के अनुसार साउंड वेव स्पेस में ट्रेवल नहीं कर सकती लेकिन साइंस यह भी कहता है की स्पेस में कही भी खाली जगह नहीं है और स्पेस डार्क मेटल से भरा हुआ है। वेदो के अनुसार मंत्र का अर्थ है क्रमबद्ध और लयबद्ध तरीके से साउंड द्वारा वाइब्रेशन को उत्पन्न करना और उस ऊर्जा का उपयोग करने का तरीका होता है। मंत्रो के द्वारा पैदा हुई वाइब्रेशन की मदद से हम स्पेस में मौजूद डार्क मेटर की एनर्जी का उपयोग कर सकते है। और यही डार्क एनर्जी की मदद से हम डार्क पार्टिकल यानी ब्लैक हॉल बना सकते है जो हमारे यान यानी स्पेसशिप के लिए एक फ्यूल की तरह काम करेगा। और यही फ्यूल की मदद से हम लाइट की स्पीड के लगभग 99 % के बराबर स्पीड प्राप्त कर सकेंगे।

अब आप यह सोच रहे होंगे की ब्लैक हॉल का उपयोग हम अपने यान में कैसे करेंगे। तो इसका उत्तर है ब्लैक होल में अनंत ग्रेविटी है जिसकी शक्ति से प्रकाश भी अपनी दिशा मोड़ लेता है। तो यही ब्लैक होल को हम अपने स्पेस शिप के आगे रखेंगे। और हमारा स्पेसशिप ग्रेविटी के खिचाव के कारन आगे बढ़ेगा। और इसी प्रक्रिया को दोहराते हुए हमारा यान लाइट के 99 % स्पीड तक पहुंच जायेगा और हम इंटरस्टेलर ट्रेवलिंग करने में सक्षम होंगे। और वो समय भी दूर नहीं होगा कि जब हम डार्क एनर्जी को समझ पाएंगे।

मान लीजिये की ऊपर बताई गई थ्योरी से यदि हमने ऐसा यान बना लिया जिसमे साउंड वेव से ब्लैक हॉल बन रहा है तो मेरा आपसे सवाल है हम अपने यान को ब्लैक हॉल से नष्ट होने से कैसे बचाएंगे ?

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जिस प्रकार नुक्लेअर रिएक्टर में नियंत्रित चेन रिएक्शन करवा कर एनर्जी को पैदा किया जाता है जिसका इस्तेमाल हम बिजली बनाने में करते है। उसी प्रकार हम ब्लैक हॉल को नियंत्रित चेन रिएक्शन में बनाकर उसकी ग्रेविटी का उपयोग यान की गति बढ़ने के लिए कर सकते है। हमे इसमें ध्यान रखना होगा कि ब्लैक हॉल से हमारे यान की अनुपातिक दुरी बनी रहे। अगर इन बातो का ध्यान रखा गया तो निश्चित ही हमारा यान कभी भी ब्लैक हॉल से नष्ट नहीं होगा।

दोस्तों आज मैंने आपको जो थ्योरी बताई है वो वैदिक साइंस के आधार पर है जो शास्त्रों में बताई गई प्रयोगविधि से प्रेरित है। अगर आपको हमारे द्वारा दी गई जानकारी पसंद आई है तो लाइक जरुर करें। इसके साथ ही आपके कोई सवाल या सुझाव हो तो कमेंट्स करे। आपके कमेंट का रिप्लाई देने में हमे ख़ुशी होगी। धन्यवाद..

 

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