18 वर्षीय नैना मंगलानी को अयाज़ अहमद नामक शांतिदूत ने स्वयं को हिन्दू रोहित कुमार बताकर प्रेम जाल में फंसाया,

लड़की को घर से भगाया और लड़की ने भी घर से भागकर घरवालों की इच्छा के विरुद्ध अयाज अहमद से आर्य समाज मंदिर में शादी की और फिर रेशमा बनकर निकाह भी पढा,

और फिर जैसा कि हमेशा से होता आया है की शांतिदूतों के मजहब व घरों के संकीर्ण वातावरण में अपने समाज और घर में सदैव बुर्के में अपने पुरुषों के आगे गुलाम की तरह सर झुकाकर बिना प्रश्न किये उनकी हर बात मानने वाली लड़कियों व महिलाओं को देखते आए अयाज़ अहमद से बचपन से स्वच्छंद वातावरण में पली-बढ़ी मां बाप की लाडली हिंदू लड़की का स्वभाव बर्दाश्त नहीं हुआ, और उसने उस पर चरित्रहीनता का आरोप लगाकर उसे गर्भवती कर छोड़ दिया।

naina manglani and ayaz ansari case jaipur

 

ठुकराई हुई हिन्दू लड़की गर्भवती होकर वापस अपने मां-बाप के घर पहुंच गई और वही उसने अयाज अहमद की संतान को जन्म दिया अलग रहते हुए भी वह उसके लिए करवा चौथ का व्रत रखती रही।

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फिर एक दिन अयाज़ ने उसे फोन किया मिलने बुलाया और फिर दिन भर घुमाने के बाद रात को उस हिंदू लड़की नैना मंगलानी और रेशमा का गला दबाकर उसकी हत्या कर दी और ईंट पत्थरों से सिर कुचलकर उसका चेहरा बिगाड़ दिया की शव किसी की पहचान में ना आए, और इस तरह एक और हिन्दू लड़की लव जिहाद की भेंट चढ़ गयी।

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समझने की बात है..

मुझे उस दिवंगत आत्मा से पूरी संवेदना है ,परंतु अपरिपक्व व कम आयु वाली लड़कियां जो बिना दुनिया को देखे समझे फिल्मी दुनिया के सेक्युलरिज़्म को यथार्थ मानकर “ह्यूमैनिटी इज़ माय रिलीजन” “माय लाइफ माय रुलज़” पर चलकर स्वछंद हिन्दू समाज व संकीर्ण शांतिदूत समाज की मानसिकता और उनके बीच व्याप्त आकाश पाताल के अंतर को समझे बिना, दोनो समाजों में महिलाओं के प्रति कानूनों का विश्लेषण किये बिना, दोनो समाजों के ताने-बाने और दोनों समाज में महिलाओं की स्थिति का आकलन किये बिना, और हिंदू पुरुषों की मानसिकता की तुलना शांतिदूत पुरुषों की संकीर्ण सोच से तुलना किये बिना शांतिदूतों को अपना जीवन साथी बना लेती हैं, उन्हें इस भूल का आगे चलकर बहुत ही भारी मोल चुकाना पड़ता है।

 

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