Pitra Parvat, Indore

मध्यप्रदेश के इंदौर शहर से लगभग 10 से 12 किलोमीटर दूर स्थित है Pitra Parvat (पितृ पर्वत)। इंदौर शहर के दिल यानी राजबाड़ा से यहां पहुंचने में महज 40 से 45 मिनट का वक्त लगता है। यहां पहुंचने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा उपलब्ध है। Pitra Parvat (पितृ पर्वत), जैसा कि नाम से ही है यह पितरों का पर्वत है। इस पर्वत का नाम पितृ पर्वत क्यों रखा गया इसके बारे में हम आपको बताते हैं। दरअसल लगभग 13 साल पहले इस पर्वत पर अपने प्रिय जनों की याद में पौधे लगाने का सिलसिला शुरू हुआ था।

जब यह सिलसिला शुरू किया गया उस समय इसका नाम देव धर्म टेकरी था। पौधे लगाने के साथ ही इस धर्म टेकरी का नाम बदलकर Pitra Parvat (पितृ पर्वत) कर दिया गया और लोग इसे पितृ पर्वत के नाम से जानने लगे। आज इस पितृ पर्वत पर लाखों पौधे पेड़ों की शक्ल ले चुके हैं और लहलहाने के साथ ही अपने साथ अपनों की यादें ताजा किए हुए हैं।

प्रति वर्ष श्राद्ध पक्ष और पितृ मोक्ष अमावस्या पर यहां पौधे रोपे जाते हैं। किसकी याद में पौधा लगाया गया है उसके नाम की पट्टिका इस पौधे के सामने लगा दी जाती है। जब भी लोगों को अपनों की याद सताती है, तो वे इस पितृ पर्वत पर पहुंच जाते हैं और पेड़ों की छांव में बैठ जाते हैं। पेड़ों की छांव में बैठने पर ऐसा प्रतीत होता है मानो बुजुर्ग अपना आशीर्वाद हमें प्रदान कर रहे हैं। दरख्तों की छांव में बैठने पर ऐसा लगता है मानो बड़े बुजुर्गों की तरह यह दरख्त भी हमें दुलार रहे हैं। पितरों की याद को सहेजने के लिए तत्कालीन महापौर कैलाश विजयवर्गीय ने बीड़ा उठाया।

Biggest Hanuman Statue

सन 2017 में हनुमान जयंती के अवसर पर इस Pitra Parvat (पितृ पर्वत) पर अष्टधातु से निर्मित हनुमान जी (Hanuman Statue) की 66 फीट ऊंची प्रतिमा को विराजित किया गया। बजरंगबली की यह प्रतिमा पूरे देश में सबसे ऊंची बैठी हनुमान जी की प्रतिमा है। 66 फीट ऊंची बजरंगबली की यह प्रतिमा 90 टन बजनी है और इसे बनाने में 10 करोड़ रुपए की लागत लगी थी। अष्टधातु से निर्मित बजरंगबली की गदा का वजन ही 21 टन है। बजरंगबली की यह गदा 45 फीट लंबी है। बजरंगबली की 90 टन वजनी इस प्रतिमा पर एक विशेष प्रकार की पॉलिश की गई है जो इस प्रतिमा का मौसम से बचाव करेगी। इस प्रतिमा का निर्माण ग्वालियर के शिल्पकारों ने किया है।

इस प्रतिमा को बनाने में 6 साल का समय लगा। 18 कारीगरों ने प्रतिदिन 10 से 12 घंटे काम कर इस प्रतिमा का निर्माण किया है। इस प्रतिमा को ग्वालियर से इंदौर शहर लाने में 6 ट्रालों की मदद ली गई और प्रतिमा के अलग-अलग हिस्सों को इंदौर लाया गया। बजरंगबली की गदा को 2 क्रेनों और 15 लोगों की मदद से पूरे 42 मिनट में ट्राले पर रखा जा सका इसके बाद इसे इंदौर लाया गया।

MP Tourism Role

मध्यप्रदेश सरकार इंदौर के इस Pitra Parvat (पितृ पर्वत) को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना चाहती है। बजरंगबली की प्रतिमा विराजित होने पर इस पितृ पर्वत को एक पिकनिक स्पॉट बनाया गया है। इस पितृ पर्वत पर रोजाना कई लोग पहुंचते हैं। रविवार को विशेष रूप से लोगों की भीड़ यहां उपस्थित होती है। अपनों की याद और पर्यावरण को संरक्षण प्रदान करने के लिए इस पितृ पर्वत पर आज लाखों पेड़ लहलहा रहे हैं जो अपनी छांव के साथ अपनों की यादें ताजा किए हुए हैं। बजरंगबली की यह विशाल प्रतिमा काफी दूर से ही नजर आने लगती है। इस पर्वत पर पहुंचने पर अद्भुत नजारा देखने मिलता है। सैकड़ों लोग यहां रोजाना पिकनिक मनाने आते हैं। पितृ पर्वत इंदौर शहर का सबसे नजदीकी पिकनिक स्पॉट बन गया है।

इस पर्वत पर लगे लाखों पेड़ और विशाल बजरंगबली की प्रतिमा लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है। इंदौर शहर के आसपास और दूरदराज के इलाकों से लोग इस पर्वत पर बजरंगबली के दर्शन करने और पिकनिक मनाने आते हैं। बजरंगबली की प्रतिमा के सामने बहुत बड़ा और उद्यान बनाया गया है। लोगों को ठहरने की उत्तम व्यवस्था प्रदान करने के लिए इस पर्वत पर एक गेस्ट हाउस भी निर्मित किया जा रहा है। इंदौर शहर के इंटरनेशनल एयरपोर्ट से यह Pitra Parvat (पितृ पर्वत) मात्र 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आप भी यहां एक बार पिकनिक मानाने जरुर जाएं।

 

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