Doomsday On Earth

हम सभी को यह बेहद अच्छी तरह से याद है कि जब साल 1999 के बाद साल 2000 आने वाला था तब दुनिया ख़त्म होने वाली थी। ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि ये बात उस वक़्त मीडिया में बड़ी तेजी से दिखाई जा रही थी। हर तरफ यही चर्चा थी कि साल 2000 में महाप्रलय आएगा (Doomsday On Earth) और ये पूरी दुनिया ख़त्म हो जाएगी। मीडिया जगत की इन ख़बरों ने ना जाने कितने ही लोगों की जान ले ली। कितने ही लोगों ने इस खबर को सुनने के बाद आत्महत्या कर ली। वजह सिर्फ थी तो वह थी दुनिया ख़त्म होने का डर। उस वक़्त इन ख़बरों से कई व्यक्ति इतने डर गए थे कि उन्होंने अपनी जीवनलीला ही समाप्त कर ली। लेकिन आज हमारे सामने 2019 समाप्त होने वाला है और दुनिया पर कोई संकट नहीं है। वह महज़ एक अफवाह थी।

Dooms Day
Dooms Day

दुनिया में आएगा महाप्रलय

हालांकि इन सभी के बीच सबसे हैरान कर देने वाली बात यह है कि दुनिया ख़त्म होने का दावा किसी जादूगर, किसी धार्मिक नेता, किसी ज्योतिषी या फिर मीडिया ने नहीं किया था। यह बात शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन के आधार पर कही थी जो गलत साबित हुई। शोधकर्ताओं का अध्ययन भले ही गलत साबित हो गया हो लेकिन दुनिया के ख़त्म होने का डर आज भी लोगों के ज़हन में कहीं न कहीं जिंदा है। हर किसी के मन में आज भी यही सवाल कौंधता है कि क्या वाकई में यह दुनिया एक दिन ख़त्म हो जाएगी? क्या सच में एक दिन दुनिया में महाप्रलय आएगा (Doomsday On Earth)? क्या सच में कोई दिन कयामत का दिन होगा? इन सभी सवालों के पीछे शोधकर्ताओं का वह अध्ययन है जिसके आधार पर उन्होंने कहा था कि तकरीबन 26 करोड़ साल पहले धरती पर पहली बार महाप्रलय (Cataclysm) हुआ था। इसके बाद से अभी तक 5 बार धरती पर महाप्रयल आ चुका है। मतलब 5 बार धरती का सर्वनाश हो चुका है और यह जीव-जंतु विहीन हो चुकी है। शोधकर्ताओं का कहना है कि अब धरती पर छठीं बार फिर वही सम्भावना बन रही है।

doomsday
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जीवन होगा समाप्त

इस बारे में अमरीका की न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मिशेल रेम्पिनो ने अपनी एक शोध रिपोर्ट प्रस्तुत की है।  अब एक बार फिर से लोगों के ज़हन में सवाल उठने लगे हैं कि आखिर महाप्रलय (Doomsday On Earth) कब आएगी? वहीं शोधकर्ताओं ने अपनी रिपोर्ट में धरती के विनाश के कारणों की जांच के बारे में बताया है। उनका मानना है कि हर बार धरती के विनाश की सभी घटनाएं पर्यावरणीय उथल-पुथल के कारण ही हुई हैं। शोधकर्ताओं ने यह भी दावा किया है कि धरती का विनाश बाढ़ और ज्वालामुखी विस्फोट की वजह से हुआ है। उनका कहना है कि जब ज्वालामुखी फटा तो धरती पर कई किलोमीटर तक लावा फैला। लावा फैलने की वजह से धरती पर जीवन समाप्त हो गया।

doomsday
Doomsday on Earth

विनाश की अवधि

कई जीव-जन्तुओं की प्रजाति पूरी तरह से विलुप्त होने का कारण भी शोधकर्ताओं ने महाप्रलय को बताया है। भूवैज्ञानिक कहते हैं कि धरती का पहले 5 बार पूरी तरह से विनाश हो चुका है। उन्होंने इन विनाशों को अवधियों के आधार पर इस तरह से विभाजित किया है।

ऑर्डोविशियन (44.3 करोड़ साल पहले), लेट डेवोनियन (37 करोड़ वर्ष पहले), पर्मियन (25.2 करोड़ वर्ष पहले), ट्रायसिक (20.1 करोड़ वर्ष पहले) और क्रेटेशियस (6.6 करोड़ वर्ष पहले) आए महाप्रलय थे जब धरती जीव-जंतु विहीन हुई थी।

Disaster on Earth
Disaster on Earth

दुनिया का अंत

शोधकर्ताओं का कहना है कि जिस तरह की परिस्थितियां बन रही हैं उन्हें देखते हुए यह कहा जा सकता है कि धरती पर छठा महाप्रलय (Doomsday On Earth) हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि कई जीवों की प्रजातियां पूरी तरह से विलुप्त हो चुकीं है जो हर बार महाप्रलय के समय हुई थी। हर बार ऐसी ही परिस्थितियों में महाप्रलय हुआ है। शोधकर्ताओं ने कहा कि जिस तरह धरती पर ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रही है उसे देखते हुए छठी बार महाप्रलय का अनुमान लगाया जा सकता है। इसके अलावा शोधकर्ताओं का कहना है कि 27.2 करोड़ से लेकर 26 करोड़ वर्ष के बाद महाप्रलय जरूर होता है। यह अध्ययन में साबित हुआ है। और अब वही अवधि पूर्ण हो रही है मतलब धरती पर एक बार फिर महाप्रलय आने वाला है। हालांकि इसके समय के बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता लेकिन यह तय है कि बेहद जल्द दुनिया ख़त्म होने की कगार पर पहुंच रही है।

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