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छोटी दिवाली

दीपावली (Diwali 2019) से ठीक 1 दिन पहले छोटी दिवाली यानी कि रूप चौदस (Roop Chaturdashi 2019) का त्यौहार मनाया जाता है। रूप चौदस को और भी कई अन्य नामों से लोग जानते हैं। इसे नरक चतुर्दशी, छोटी दिवाली, काली चतुर्दशी और रूप चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धर्म में दीपावली को सबसे बड़ा पर्व कहा गया है और इस त्यौहार का बेहद अधिक महत्व है। दीपावली का त्यौहार दीपावली के 2 दिन पहले से यानी धनतेरस (Dhanteras 2019) से शुरू हो जाता है। यह त्यौहार पूरे पांच दिनों तक मनाया जाता है।

रूप चौदस आज

दीपावली (Diwali 2019) के 5 दिनों में 5 त्यौहार मनाए जाते हैं। सबसे पहले धनतेरस (Dhanteras 2019) का त्यौहार मनाया जाता है। देश भर में कल यानी 25 अक्टूबर को धनतेरस का त्यौहार मनाया गया। अब आज यानी 26 अक्टूबर को पूरे देश में रूप चौदस (Roop Chaturdashi 2019) की धूम रहेगी। ऐसी मान्यता है कि इस दिन सूर्योदय से पूर्व शुभ मुहूर्त में स्नान करना बेहद शुभ होता है। ऐसा करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और व्यक्ति को मृत्यु के बाद स्वर्ग की प्राप्ति होती है। इस वजह से इसे नरक चतुर्दशी कहा जाता है।

निखरता है रूप

वैसे धर्म शास्त्रों के अनुसार रूप चौदस (Roop Chaturdashi 2019) महिलाओं के लिए बेहद ख़ास होता है। इस दिन सभी स्त्रियां अपने सौन्दर्य को निखारती हैं। इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले स्नान के बाद महिलाएं हल्दी और बेसन का उबटन लगाती हैं। इस ख़ास उबटन को लगाने से उनका सौन्दर्य और भी ज्यादा निखर जाता है। यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। शास्त्रों के मुताबिक़ इस दिन ये खास उबटन लगाने से पूरे साल महिलाओं का सौन्दर्य निखरा रहता है।

पापों से मुक्ति

रूप चौदस (Roop Chaturdashi 2019) पर मृत्यु के देवता यमराज को दीपदान करने की भी परंपरा है। इसलिए इस दिन यम के नाम का दीपक जलाया जाता है। वहीं इस दिन व्रत भी रखा जाता है और इसका भी ख़ास महत्व है। कहा जाता है इस व्रत का पालन करने वालों पर श्रीकृष्ण की कृपा बरसती हैं। और भगवान श्री कृष्ण व्रत रखने वालों को सौन्दर्य प्रदान करते हैं। इस दिन श्री हरी विष्णु और श्री कृष्ण के दर्शन करने से पापों से मुक्ति मिलती है।

यमराज को दीपदान

प्राचीन मान्यता के अनुसार रूप चौदस (Roop Chaturdashi 2019) की शाम को यमराज को दीपदान किया जाता है। इसके लिए घर का बुजुर्ग सदस्य एक दिए को जलाकर उसे पूरे घर में घुमाता है। इसके बाद इस दिए को घर से बाहर किसी दूर स्थान पर रख दिया जाता है। इस दिए को यम का दिया कहते हैं और घर के बाकी सदस्यों को घर से बाहर न निकलने की हिदायत भी दी जाती है। धर्म-शास्त्रों के अनुसार ऐसा करने से घर की सारी नकारात्मक उर्जा घर से बाहर निकल जाती है और यमराज प्रसन्न होते हैं। ऐसा करने से घर के सदस्यों को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता। इस दिन यमराज की पूजा और उपासना भी की जाती है।

Roop Chaturdashi शुभ मुहूर्त

चतुर्दशी तिथि आरंभ – 26 अक्टूबर दोपहर 3 बजकर 46 मिनट से

चतुर्दशी तिथि समाप्त – 27 अक्टूबर दोपहर 12 बजकर 33 मिनट पर

स्नान का शुभ मुहूर्त – 27 अक्टूबर प्रातःकाल 5 बजकर 15 मिनट से 6 बजकर 30 मिनट

स्नान की कुल अवधि – 1 घंटा 15 मिनट।

 

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