मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (Devi Ahilya Vishwavidyalaya) के कुलपति नरेन्द्र धाकड़ (Narendra Dhakad) को सोमवार 24 जून को बर्खास्त कर दिया गया। राज्य सरकार द्वारा देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (Devi Ahilya Vishwavidyalaya) में धारा 52 लागू कर कुलपति नरेन्द्र धाकड़ (Narendra Dhakad) को उनके पद से बर्खास्त कर दिया गया। दरअसल डीएवीवी (DAVV) में रविवार 23 जून को कॉमन एंट्रेस टेस्ट (CET) की परीक्षा का आयोजन किया गया था। इस परीक्षा में भारी गड़बड़ी हो जाने के बाद सोमवार को कुलपति को बर्खास्त कर दिया गया।

छात्रों ने किया हंगामा

गौरतलब है कि रविवार को देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी में ऑनलाइन सीईटी (CET) परीक्षा का आयोजन किया गया था। इस दौरान ही सर्वर डाउन हो जाने से परीक्षा में काफी गड़बड़ी आ गई। पूरा सिस्टम फेल हो जाने की वजह से तकरीबन 1300 छात्रों की परीक्षा को रद्द करना पड़ा। परीक्षा रद्द किए जाने से छात्रों ने कॉलेज परिसर में हंगामा शुरू कर दिया। छात्रों ने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (Devi Ahilya Vishwavidyalaya) में धारा 52 लागू किए जाने की मांग की। इसके बाद राज्य सरकार ने आदेश जारी कर देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (Devi Ahilya Vishwavidyalaya) में धारा 52 लागू कर कुलपति नरेद्र धाकड़ को बर्खास्त कर दिया।

साल 2015 में हुए थे नियुक्त

अब देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी में प्रभारी कुलपति को नियुक्त किया जाएगा। आगामी 6 माह के दौरान नए कुलपति की नियुक्ति की जाएगी। गौरतलब है कि नरेन्द्र धाकड़ (Narendra Dhakad) को 7 मई साल 2016 में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (Devi Ahilya Vishwavidyalaya) का कुलपति नियुक्त किया गया था। साल 2015 में नरेन्द्र धाकड़ (Narendra Dhakad) उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त संचालक पद से रिटायर हुए थे।

तीसरी बार लगी धारा 52

यह पहला मौका नहीं है जब इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (Devi Ahilya Vishwavidyalaya) में धारा 52 लागू की गई हो। इससे पहले भी 2 बार धारा 52 लागू की जा चुकी है। सबसे पहले धारा 52 लगाकर कुलपति उमरावसिंह चौधरी को बर्खास्त किया गया था। इसके बाद साल 2003 में कुलपति डॉ। भारत छापरवाल को राज्य सकरार ने धारा 52 लगाकर बर्खास्त किया था।

यह है धारा-52

दरअसल मध्यप्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 की धारा-52 के अंतर्गत राज्य सरकार को यह अधिकार दिया गया है कि, राज्य के किसी भी विश्वविद्यालय में किसी भी प्राकर की अव्यवस्था, आर्थिक अनियमितता, भ्रष्ट्राचार या फिर विश्वविद्यालय संचालन में लापरवाही बरते जाने पर वह यूनिवर्सिटी के कुलपति को हटा सकती है। देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी के संचालन में लापरवाही बरते जाने पर राज्य सरकार द्वारा धारा 52 लगाई गई है। और कुलपति नरेन्द्र धाकड़ (Narendra Dhakad) को उनके पद से हटा दिया गया है।

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