सड़क पर उतरे व्यापारी ने किया प्रदर्शन

इंदौर। शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए इंदौर के कई इलाको को तोडा जा रहा है। रोड चौडिकरण के लिए सीतलामाता चौराहे से गोराकुंड चौराहे तक दुकानो और मकानों को तोडा जा रहा है। जाहिर सी बात है इंदौर की शान कपडा मार्किट पर इससे ख़ासा प्रभाव पड़ेगा। बताया जा रहा है की करीब 200 व्यापारी इससे सड़क पर आ जायेंगे। इसी विरोध में आज व्यापारी संग खुलकर सामने आए है। आज यानी शुक्रवार को सीतलामाता बाजार का व्यापारि संग अपनी दुकानें बंद कर सड़क पर निगम के खिलाफ खड़ा हो गया है। व्यापारियों का गुस्सा जाहिर है, उनका कहना है की शहर को स्मार्ट बनाने के चक्कर में उनकी दुकाने टूट रही है जिससे कई लोग बेरोजगार होंगे। इसके साथ ही उनका कहना है की कमर्शियल एरिया को स्मार्ट बनाने से अच्छा है शहर के अन्दर दूसरी जगह विकास किया जाना चाहिए।

शनिवार को मार्केट हुआ बंद

शीतलामाता बाज़ार के व्शयापारियों ने शनिवार को अपनी दुकाने बंद रख काला देवास मनाया। सुबह से कपडा मार्केट को बंद रखा गया वही सभी व्यापारियों ने साथ मिलकर जमकर विरोध प्रदर्शन भी किया। ‘नगर निगम की गुंडागर्दी नहीं चलेगी’ एसे कई नारे भी लगाये गए। इसके बाद शीतलामाता चोराहे से राजवाडा तक विरोध जताते हुए जुलुस भी निकला। व्यापारियों ने कहा कि निगम की तानाशाही के खिलाफ उनका आंदोलन जारी रहेगा और पुराने इंदौर की पहचान और धरोहर को टूटने नहीं दिया जाएगा।

व्यापारियों ने इस दौरान हमारी भूल कमल का फूल के नारे भी लगाए। व्यापारी नहीं चाहते हैं कि स्मार्ट सिटी के नाम पर उनकी दुकानें के हिस्से को तोड़ दिए जाएं।

जयरामपुर कॉलोनी से गोराकुंड चौराहे तक की सड़क 40 फीट की है जिसे निगम चौड़ी कर 60 फीट कर देना चाहती है। निगम ने अपना काम शुरू भी कर दिया है और सभी दुकानों व भवनों पर मार्किंग भी हो गई है। 1.2 किलोमीटर लंबी यह सड़क पर सीतलामाता बाजार जैसा प्रमुख व्यापारिक क्षेत्र शामिल है। नगर निगम द्वारा जो दुकानों व भवनों पर मार्किंग की गई है उसके अनुसार रोड के दोनों तरफ 3 से 5 फीट तक तोड़फोड़ की जानी है। इसी तोड़फोड़ को रोकने के लिए व्यापारियों द्वारा विरोध पर्दर्शन किया जा रहा है। बता दे की इस रोड़ पर 8 अति प्राचीन मंदिर भी स्थित है जिन पर निगम के पंजे का संकट मंडरा रहा है। इसके अलावा भी यहां स्थित कई दुकाने 125 साल पुरानी है जिसके कारण इंदौर ऐतिहासिक महत्व के लिए भी पहचाना जाता है। इंदौर नगर पालिका को इन ऐतिहासिक भवनों और दुकानों को तोड़ने के बजाय इन्हें सहेजने पर विचार करना चाहिए।

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